उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दिव्यांग छात्राओं के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। बुंदेलखंड के बांदा जिले में स्कूल, कॉलेज या ट्रेनिंग सेंटर जाने वाली दिव्यांग बेटियों को मुफ्त मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल दी जाएगी। इससे उनकी पढ़ाई आसान होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
यह योजना सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि दिव्यांग बेटियों के सपनों को पंख लगाने वाला तोहफा है। आवागमन की समस्या खत्म होने से वे बिना रुके अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगी।
योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सरकार का मकसद दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा और रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ना है। शारीरिक परेशानी के कारण कई लड़कियां स्कूल या कॉलेज नहीं जा पातीं। अब मुफ्त ई-ट्राईसाइकिल मिलने से यह बाधा दूर हो जाएगी। वे समय पर पढ़ाई कर सकेंगी और आगे चलकर आत्मनिर्भर जीवन जी सकेंगी।
यह कदम प्रधानमंत्री के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को मजबूत बनाता है।
कितनी छात्राओं को मिलेगा फायदा?
बांदा जिले में सदर, तिंदवारी, बबेरू और नरैनी समेत सभी विधानसभा क्षेत्रों से प्रत्येक विधानसभा से 20-20 दिव्यांग छात्राओं का चयन किया जाएगा। विभाग ने चिन्हित करने और आवेदन लेने का काम शुरू कर दिया है।
कौन-कौन सी छात्राएं पात्र हैं?
योजना में मुख्य रूप से 16 साल से ऊपर की उम्र वाली दिव्यांग छात्राओं को प्राथमिकता दी जा रही है। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों की बेटियों को सबसे पहले मौका मिलेगा।
छात्रा किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज या तकनीकी ट्रेनिंग सेंटर में नियमित रूप से पढ़ रही होनी चाहिए।
आवेदन कैसे करें? जरूरी दस्तावेज
आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है। उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।
जरूरी दस्तावेज ये हैं:
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र या यूडीआईडी कार्ड
- आय या जाति प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड
- स्कूल/कॉलेज में पढ़ाई का प्रमाण
अधिक जानकारी के लिए विकास भवन स्थित जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
योजना के फायदे एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| लाभ | मुफ्त मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल |
| संख्या | प्रत्येक विधानसभा से 20 छात्राएं |
| आयु | 16 वर्ष से अधिक |
| प्राथमिकता | बीपीएल परिवार की छात्राएं |
| शर्त | स्कूल/कॉलेज/ट्रेनिंग में नियमित पढ़ाई |
| आवेदन | ऑनलाइन, विभाग की वेबसाइट पर |
क्यों है यह योजना खास?
यह सिर्फ वाहन वितरण नहीं है। इससे दिव्यांग बेटियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर देश निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगी। बांदा के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस संवेदनशील फैसले का स्वागत किया है।
उपनिदेशक सत्येंद्र कुमार ने बताया कि आवेदन शुरू हो गए हैं और बीपीएल परिवार की छात्राओं को वरीयता दी जाएगी।
दिव्यांग छात्राओं के लिए यह योजना शिक्षा और स्वतंत्रता का रास्ता खोलती है। जो बेटियां विपरीत परिस्थितियों में भी पढ़ना चाहती हैं, उन्हें अब सरकार का मजबूत सहारा मिलेगा। सही समय पर आवेदन करके इस मौके का फायदा जरूर उठाएं।

