उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गो संरक्षण (गाय की देखभाल और सुरक्षा) को नई ऊंचाई देने वाली है। सरकार अब Gen Z यानी जेन जेड (जिनकी उम्र लगभग 12 से 27 साल के बीच है) और युवाओं को इस काम से जोड़ना चाहती है। इसके लिए करीब 10 हजार गो मित्र तैयार किए जाएंगे।
यह सिर्फ गायों की सेवा नहीं है। सरकार इसे गांवों की अर्थव्यवस्था (पैसे कमाने का तरीका), प्राकृतिक खेती, महिलाओं को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भरता का मॉडल बनाना चाहती है।
क्यों जोड़ा जा रहा है जेन जेड को?
जेन जेड युवा नई सोच वाले होते हैं। सरकार चाहती है कि ये युवा समझें कि गो सेवा सिर्फ पुरानी परंपरा नहीं है। यह हरित अर्थव्यवस्था (हरा और साफ पर्यावरण वाला काम) का आधार है। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बच्चों और युवाओं को देसी गाय, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और गोमूत्र से बने उत्पादों के फायदे बताए जाएंगे।
मास्टर ट्रेनर्स का नेटवर्क बनेगा। ये ट्रेनर्स खुद सीखकर दूसरों को सिखाएंगे। जिन लोगों को पहले से गो सेवा में दिलचस्पी है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
यूपी में गो संरक्षण की मौजूदा स्थिति
- राज्य में 7,500 से ज्यादा गो आश्रय स्थल (गौशालाएं) चल रहे हैं।
- इनमें 12 लाख से ज्यादा गोवंश (गाय-बैल) सुरक्षित हैं।
- हर गोवंश के लिए सहायता राशि 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।
- ज्यादातर गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं ताकि निगरानी अच्छी रहे।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के जरिए लगभग 1.15 लाख पशुपालकों को करीब 1.85 लाख गोवंश दिए गए हैं। इससे गायों को परिवार के साथ रखने का मौका मिला है। उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन में देश में नंबर-1 है। सरकार पशुपालकों को स्थायी रोजगार देना चाहती है।
गोशालाओं से गो-उद्योग तक
सरकार गौशालाओं को सिर्फ आश्रय नहीं, बल्कि व्यवसायिक इकाइयां बनाना चाहती है। गोबर से कई चीजें बनाई जा रही हैं:
| उत्पाद का नाम | क्या बनता है | फायदा |
|---|---|---|
| गो-पेंट | दीवारों के लिए पेंट | पर्यावरण के अनुकूल |
| वर्मीकंपोस्ट | जैविक खाद | खेती के लिए अच्छा |
| धूपबत्ती | पूजा के लिए | आमदनी का जरिया |
| गो-काष्ठ | लकड़ी जैसी चीज | ईंधन और अन्य उपयोग |
| पंचगव्य, जीवामृत | प्राकृतिक उत्पाद | खेती और स्वास्थ्य के लिए |
महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को इसमें जोड़ा जा रहा है। इससे गांव की महिलाओं को घर के पास ही रोजगार मिल रहा है। जो गोबर पहले कचरा माना जाता था, वह अब आमदनी और ऊर्जा का स्रोत बन गया है।
हर जिले के हिसाब से प्लान
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग हर जिले की गौशालाओं का मूल्यांकन कर रहा है। जहां बायोगैस बनाने की अच्छी संभावना है, वहां बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। दूसरे जिलों में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र वाली दवाइयां बनाने की इकाइयां खुलेंगी। स्थानीय संसाधनों के अनुसार रोजगार के नए मौके बनाए जाएंगे।
मुख्य बातें एक नजर में:
- 10 हजार गो मित्र तैयार होंगे जो जेन जेड और युवाओं को जोड़ेंगे।
- गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत मॉडल बनाया जाएगा।
- गोबर से गो-पेंट, खाद, धूपबत्ती जैसे उत्पाद बनेंगे।
- महिलाओं को स्वरोजगार मिलेगा।
- हर जिले की जरूरत के हिसाब से काम होगा।
यह योजना गो संरक्षण को सिर्फ धार्मिक या परंपरा का काम न रखकर युवाओं के लिए रोजगार और पर्यावरण का काम बनाने की दिशा में है। गांवों में जागरूकता बढ़ाकर नई पीढ़ी को इससे जोड़ा जाएगा।

