AI का असर: फ्रेशर्स की नौकरियों पर संकट, लेकिन कुल मिलाकर रोजगार बढ़ा — जानिए Nomura रिपोर्ट की पूरी सच्चाई

By Arman

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Impact of AI Threat to jobs for freshers

आजकल हर कोई यही सोच रहा है कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की वजह से नौकरियां जा रही हैं या बढ़ रही हैं? इसी सवाल का जवाब जापान की मशहूर फाइनेंशियल कंपनी Nomura ने अपनी नई रिपोर्ट में दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में AI ने जितनी नौकरियां छीनी हैं, उससे कहीं ज्यादा नई नौकरियां भी दी हैं। लेकिन एक बात चिंता की भी है — फ्रेशर्स यानी नए ग्रेजुएट्स के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं।

Nomura रिपोर्ट में क्या निकलकर आया?

Nomura के डेटा के अनुसार भारत में AI की वजह से करीब 83,100 लोगों को नई नौकरी मिली, जबकि लगभग 31,921 लोगों की नौकरी गई या उन्हें कंपनी छोड़नी पड़ी। यानी कुल मिलाकर 51 हजार से ज्यादा नौकरियों का फायदा हुआ है। एशिया के जिन देशों का Nomura ने अध्ययन किया, उनमें भारत में ही AI का सबसे बड़ा असर देखा गया — चाहे वो नौकरी जाने के मामले में हो या नई नौकरी मिलने के मामले में।

दो तरह का बन गया है जॉब मार्केट

रिपोर्ट की सबसे अहम बात यह है कि AI ने नौकरी बाजार को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ अनुभवी और सीनियर कर्मचारियों की मांग अभी भी अच्छी बनी हुई है। दूसरी तरफ नए और कम अनुभव वाले लोगों (फ्रेशर्स) के लिए मौके घटते जा रहे हैं। Nomura के इकोनॉमिस्ट Sonal Varma और Si Ying Toh का कहना है कि ज्यादातर छंटनी उन टीमों में हुई है जिनकी जगह अब चैटबॉट ने ले ली है, जबकि नई भर्तियां मुख्यतः IT-सर्विस के ग्रेजुएट्स की हो रही हैं।

किन नौकरियों पर सबसे ज्यादा खतरा है?

Nomura की रिपोर्ट के अनुसार AI का सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में देखा जा रहा है:

  • बैंकिंग का बैक-ऑफिस काम
  • कस्टमर सर्विस (ग्राहक सेवा) की नौकरियां
  • जूनियर टेक्निकल रोल जैसे क्वालिटी टेस्टिंग और कोडिंग

खास बात यह है कि ज्यादातर कंपनियां सीधे लोगों को नौकरी से नहीं निकाल रहीं, बल्कि नई भर्तियां धीमी कर दी गई हैं। स्टाफिंग फर्म Xpheno के मुताबिक भारतीय IT कंपनियों की नई भर्ती FY22 में 6 लाख थी, जो अब घटकर FY26 में सिर्फ 1.4 लाख रह गई है। यानी कैंपस से होने वाली भर्तियों में बड़ी कमी आई है।

फ्रेशर्स सबसे ज्यादा प्रभावित क्यों?

ICRIER (इक्रियर) के सर्वे, जिसमें भारत की 651 IT कंपनियों को शामिल किया गया, उसमें चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया:

  • 55% कंपनियों ने माना कि उनकी एंट्री-लेवल (फ्रेशर) हायरिंग घटी है
  • सिर्फ 25% कंपनियों ने मिड-लेवल हायरिंग में कमी बताई
  • और केवल 14% कंपनियों ने सीनियर लेवल पर कमी की बात कही

इससे साफ पता चलता है कि AI का सबसे बड़ा झटका करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं को लग रहा है।

तो क्या AI से नौकरियां सच में बढ़ रही हैं?

Nomura की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अभी तक के आंकड़े इस डर को गलत साबित करते हैं कि AI बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म कर देगा। ज्यादातर नई नौकरियां टेक्नोलॉजी सेक्टर में बन रही हैं — एशिया में बनी कुल AI नौकरियों में से 90% से ज्यादा टेक सेक्टर की ही हैं। भारत में खासतौर पर AI डेटा एनोटेशन और भाषा (linguistics) से जुड़े काम में नई नौकरियां मिल रही हैं।

हालांकि Nomura ने यह चेतावनी भी दी है कि AI अभी शुरुआती दौर में है और इसका असली असर समझने में अभी कई साल लग सकते हैं।

यह रिपोर्ट

कुल मिलाकर Nomura की यह रिपोर्ट एक मिली-जुली तस्वीर पेश करती है। एक तरफ AI की वजह से भारत में नौकरियों की संख्या घटने के बजाय बढ़ी है, जो राहत की बात है। लेकिन दूसरी तरफ, यह फायदा सबको बराबर नहीं मिल रहा — अनुभवी लोगों को जहां फायदा हो रहा है, वहीं नए ग्रेजुएट्स और फ्रेशर्स के लिए नौकरी पाना पहले से मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि छात्र और नए ग्रेजुएट्स सिर्फ डिग्री पर निर्भर न रहें, बल्कि AI से जुड़े नए स्किल्स सीखें, ताकि वे बदलते जॉब मार्केट में खुद को बेहतर तरीके से तैयार कर सकें।

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