भारत सरकार ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की मदद के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की है। यह योजना उन लोगों के लिए है जो हाथ से काम करते हैं और पुराने पारंपरिक धंधों में लगे हैं। इसमें ट्रेनिंग, पैसे की मदद और सस्ता लोन मिलता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कौन लाभ ले सकता है और क्या-क्या फायदे हैं।
पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
यह योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही है। इसका मकसद पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक स्किल सिखाना, अच्छे औजार देना और अपना काम बढ़ाने के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध कराना है। योजना में 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है।
किन्हें मिलता है इस योजना का लाभ?
योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलता है जो इन शर्तों को पूरा करते हैं:
- उम्र: पंजीकरण के समय कम से कम 18 साल होनी चाहिए।
- काम का तरीका: हाथ और औजारों से काम करने वाला कारीगर या शिल्पकार होना चाहिए।
- क्षेत्र: असंगठित क्षेत्र में स्व-रोजगार के आधार पर काम करना चाहिए।
- परिवार: परिवार के केवल एक सदस्य को ही लाभ मिलेगा (पति, पत्नी या अविवाहित बच्चे)।
- पिछला लोन: पिछले 5 साल में PMEGP, मुद्रा या पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं से लोन नहीं लिया होना चाहिए (कुछ मामलों में पूरी तरह चुकाया हुआ हो तो छूट मिल सकती है)।
- सरकारी नौकरी: सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य पात्र नहीं हैं।
18 पारंपरिक व्यवसाय जिनमें काम करने वाले लोग जुड़ सकते हैं:
- बढ़ई (सुतार)
- नाव बनाने वाले
- अस्त्रकार
- लोहार
- हथौड़ा और टूलकिट बनाने वाले
- ताला बनाने वाले
- सुनार
- कुम्हार
- मूर्तिकार / पत्थर तराशने वाले / पत्थर तोड़ने वाले
- मोची / जूता बनाने वाले
- राजमिस्त्री
- टोकरी / चटाई / झाड़ू बनाने वाले
- गुड़िया और पारंपरिक खिलौना बनाने वाले
- नाई
- मालाकार
- धोबी
- दर्जी
- मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले
योजना के मुख्य लाभ
योजना में कई फायदे एक साथ मिलते हैं:
- प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड: लाभार्थी को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र मिलता है।
- मुफ्त ट्रेनिंग और रोजाना 500 रुपये: बेसिक ट्रेनिंग (5-7 दिन) और एडवांस ट्रेनिंग (15 दिन) दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान रोजाना 500 रुपये स्टाइपेंड मिलता है।
- 15,000 रुपये की टूलकिट मदद: आधुनिक औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये का ई-वाउचर दिया जाता है।
- सस्ता लोन: बिना गारंटी का लोन मिलता है। पहले 1 लाख रुपये (18 महीने के लिए), फिर जरूरत पड़ने पर 2 लाख रुपये (30 महीने के लिए)। कुल 3 लाख रुपये तक। ब्याज दर सिर्फ 5 प्रतिशत है।
- डिजिटल लेनदेन पर इनाम: डिजिटल पेमेंट करने पर प्रति लेनदेन 1 रुपये का इनाम (महीने में अधिकतम 100 लेनदेन तक)।
- मार्केटिंग सपोर्ट: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचने और ब्रांडिंग में मदद।
लाभों की तुलना तालिका
| लाभ का प्रकार | विवरण | राशि / अवधि |
|---|---|---|
| ट्रेनिंग स्टाइपेंड | ट्रेनिंग के दौरान रोजाना मदद | 500 रुपये प्रति दिन |
| टूलकिट अनुदान | औजार खरीदने के लिए | 15,000 रुपये |
| पहला लोन | बिना गारंटी, सस्ती ब्याज दर | 1 लाख रुपये (18 महीने) |
| दूसरा लोन | पहले लोन के बाद | 2 लाख रुपये (30 महीने) |
| ब्याज दर | लाभार्थी को चुकानी पड़ने वाली | 5 प्रतिशत |
| डिजिटल इनाम | डिजिटल लेनदेन पर | 1 रुपये प्रति लेनदेन |
सबसे महत्वपूर्ण बात: यह योजना सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो ऊपर बताए गए 18 व्यवसायों में से किसी एक में सक्रिय रूप से काम कर रहे हों। पंजीकरण आधिकारिक पोर्टल या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से किया जा सकता है।
यह योजना पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके काम को आगे बढ़ाने का अच्छा मौका देती है। अगर आप इन व्यवसायों से जुड़े हैं तो पात्रता चेक करके जल्द आवेदन करें।

