देश में परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों से कई वादे किए थे। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) यह देखने जा रही है कि सरकार ने अपने ये वादे कितने पूरे किए हैं। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो संगठन एक बार फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर सकता है।
आज होगी CJP की बड़ी बैठक
24 अगस्त, यानी सोमवार को CJP अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति (देशभर के बड़े पदाधिकारियों की बैठक) की मीटिंग बुला रही है। इसमें यह जांचा जाएगा कि 25 जुलाई को आंदोलन खत्म करते समय सरकार ने जो वादे किए थे, उन पर अब तक क्या काम हुआ है।
पार्टी का कहना है कि सरकार की तरफ से अभी तक इस बारे में कोई साफ जानकारी नहीं दी गई है कि वादों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
फिर से आंदोलन की चेतावनी क्यों
CJP ने कहा है कि उन्होंने अच्छी नीयत (नेक इरादे) से आंदोलन वापस लिया था, क्योंकि सरकार ने युवाओं से वादा किया था। लेकिन संगठन ने साफ कर दिया है कि इस भलमनसाहत को कमजोरी न समझा जाए। अगर जरूरत पड़ी, तो एक और शांतिपूर्ण देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
बैठक में किन बातों पर होगी बात
- वादों की जांच: परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता (साफ-सुथरा और खुला तरीका) लाने और पेपर लीक रोकने वाले कानूनों पर सरकार ने अब तक क्या किया, इसकी समीक्षा होगी।
- छात्रों की राय: देशभर के छात्र नेताओं, परीक्षार्थियों और शिक्षा जगत के लोगों से फीडबैक लिया जाएगा।
- आगे की रणनीति: अगर सरकार का काम असंतोषजनक लगा, तो नए विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जाएगी।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई थी
पिछले कुछ समय में NEET, UGC-NET जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे। इससे नाराज छात्रों ने देशभर में जोरदार प्रदर्शन किए। इसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।
CJP का कहना है कि छात्र लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं कि ये वादे असल में जमीन पर उतरें, ताकि लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगी थी FIR की लिस्ट
18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR की एक पूरी लिस्ट मांगी थी। CJP के मुताबिक, अदालत ने यह लिस्ट तीन बार मांगी, ताकि आर्टिकल 142 (सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्ति, जिससे वह न्याय के लिए खास आदेश दे सकता है) के तहत केस रद्द करने पर विचार किया जा सके। लेकिन सरकार ने अब तक यह लिस्ट देने का कोई वादा नहीं किया।
इस पर CJP के सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकार युवाओं के साथ धोखा करती दिख रही है।
आंदोलन वापस लेते समय क्या शर्तें रखी गई थीं
CJP ने जुलाई में आंदोलन इन शर्तों पर वापस लिया था:
- छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेना या रद्द करना
- आगे किसी तरह की सख्त कार्रवाई न करने की गारंटी
- NEET-UG पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने पर जिन छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी, उनके परिवारों को मुआवजा देना
CJP ने चेतावनी दी है कि इन वादों को टालना, तोड़ना या उनका गलत मतलब निकालना देश के युवाओं के साथ धोखा माना जाएगा।
गौरतलब है कि CJP ने 25 जुलाई को यह आंदोलन तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद वापस लिया था। यह पूरा आंदोलन NEET पेपर लीक विवाद और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर था।

