कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की वजह से नौकरियों को लेकर चर्चा जोरों पर है। कई लोग सोचते हैं कि AI नौकरियां छीन रहा है। लेकिन नोमुरा की नई रिपोर्ट ने एक अलग तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार AI ने जितनी नौकरियां खत्म कीं, उससे कहीं ज्यादा नई नौकरियां पैदा की हैं। फिर भी फ्रेशर्स यानी नए ग्रेजुएट्स के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।
AI ने कितनी नौकरियां बनाईं और कितनी लीं?
नोमुरा की रिपोर्ट “बियॉन्ड द हेडलाइंस” में एशिया के 69 कंपनियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। 2022 से अगस्त 2026 तक AI से जुड़े करीब 1 लाख 31 हजार नए पद बने, जबकि सिर्फ 61 हजार पद प्रभावित हुए। भारत, चीन और फिलीपींस जैसे देशों में AI का असर सकारात्मक रहा। भारत में AI से जुड़ी भर्तियां छंटनी से कहीं ज्यादा रहीं।
फ्रेशर्स पर सबसे ज्यादा मार क्यों?
रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि बाजार में K-आकार का ट्रेंड चल रहा है। मतलब अनुभवी और सीनियर लोगों की मांग बढ़ी है, जबकि एंट्री-लेवल यानी फ्रेशर्स की भर्ती घटी है।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस के सर्वे के मुताबिक भारत की 55 प्रतिशत आईटी कंपनियों ने एंट्री-लेवल भर्ती घटा दी है। वहीं सीनियर रोल्स में यह गिरावट सिर्फ 14 प्रतिशत रही।
साइलेंट फायरिंग क्या है?
कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी नहीं कर रही हैं। इसके बजाय वे नए लोगों को कम रख रही हैं। इसे नोमुरा ने साइलेंट फायरिंग कहा है। स्टाफिंग फर्म एक्सफेनो के आंकड़ों के अनुसार भारतीय आईटी सेक्टर में नेट हायरिंग वित्त वर्ष 2022 के करीब 6 लाख से घटकर वित्त वर्ष 2026 में महज 1.4 लाख रह गई है। कैंपस प्लेसमेंट में भी सुस्ती साफ दिख रही है।
किन कामों पर सबसे ज्यादा असर?
AI की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले काम हैं:
- बैंकिंग बैक-ऑफिस (डेटा एंट्री, रिकॉन्सिलिएशन)
- कस्टमर सपोर्ट (जहां चैटबॉट काम कर रहे हैं)
- जूनियर टेक्निकल रोल्स (बेसिक कोडिंग और टेस्टिंग)
वहीं मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में इंसानी मौजूदगी जरूरी होने के कारण ये अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।
नए अवसर कहां बन रहे हैं?
90 प्रतिशत से ज्यादा नई AI नौकरियां टेक्नोलॉजी सेक्टर में ही केंद्रित हैं। भारत में डेटा एनोटेशन, भाषा संबंधी काम और AI-सक्षम आईटी सेवाओं में भर्तियां हो रही हैं। बैंकों में AI रिस्क एनालिस्ट और ऑटोनॉमस व्हीकल विशेषज्ञों की मांग भी बढ़ी है।
फ्रेशर्स के लिए क्या चुनौती है?
असली समस्या यह है कि जब एंट्री-लेवल नौकरियां कम हो जाएंगी तो भविष्य के अनुभवी कर्मचारी कहां से आएंगे। फ्रेशर्स के लिए अब सिर्फ पारंपरिक कोडिंग काफी नहीं है। AI स्किल्स, डेटा हैंडलिंग और नई टेक्नोलॉजी सीखनी होगी।
AI नौकरियां छीनने से
नोमुरा रिपोर्ट साफ बताती है कि AI नौकरियां छीनने से ज्यादा दे रहा है, लेकिन फायदा सबको बराबर नहीं मिल रहा। अनुभवी लोगों को मौके मिल रहे हैं, जबकि फ्रेशर्स को पहली नौकरी पाना मुश्किल हो गया है। युवाओं को चाहिए कि वे AI, डेटा साइंस और नई स्किल्स सीखें। कंपनियों और सरकार को भी फ्रेशर्स के लिए नए रास्ते खोलने होंगे। बदलते जमाने में स्किल अपग्रेड ही सफलता की कुंजी है।

