आज 28 जुलाई 2026 को झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोपों ने युवाओं को सड़क पर उतार दिया है। जेएमएम-कांग्रेस सरकार के खिलाफ छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दिल्ली में कांग्रेस पेपर लीक पर शोर मचाती है, लेकिन झारखंड में चुप्पी साधे हुए है। जानिए पूरी कहानी
क्या है झारखंड भर्ती घोटाला?
झारखंड में जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) और जेएसएसएससी की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप हैं। युवा कहते हैं कि नौकरी के नाम पर उन्हें ठगा गया। पिछले 20 साल में 10 भर्तियों की जांच सीबीआई कर रही है। 6 और मामले जांच में हैं। जुलाई से सितंबर 2026 की 9 परीक्षाएं स्थगित हो चुकी हैं।
मुख्य विवाद 14वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स परीक्षा के नतीजों पर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर सीआईडी जांच कर रही है। अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के घर भी छापा पड़ा।
छात्रों के मुख्य आरोप क्या हैं?
- कट-ऑफ मार्क्स कैटेगरी के हिसाब से जारी नहीं किए गए।
- मेरिट लिस्ट पर कमीशन के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे।
- ओएमआर शीट में गड़बड़ी – सही जवाब देने के बावजूद नंबर कम बताए गए।
- ब्लैकलिस्टेड कंपनी टीडीपीएल को परीक्षा का ठेका दिया गया (हालांकि पूर्व अध्यक्ष का कहना है कि ठेका देते समय वह ब्लैकलिस्टेड नहीं थी)।
रांची में बापू प्रतिमा के पास नीले तिरपाल लगाकर छात्र बैठे हैं। एक अभ्यर्थी दिवाकर कुमार कहते हैं, “मुख्यमंत्री जी, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करें। परीक्षा रद्द कर दोबारा कराएं। सिस्टम पर भरोसा नहीं रहा।”
विपक्ष का दोहरा रवैया क्यों सवालों के घेरे में?
जब भाजपा शासित राज्यों में पेपर लीक होता है तो विपक्ष सड़क पर उतरता है। लेकिन झारखंड जैसे विपक्ष शासित राज्य में चुप्पी। दिल्ली में कांग्रेस संसद से सड़क तक हंगामा करती है, लेकिन 1200 किलोमीटर दूर रांची में उनकी अपनी सरकार के खिलाफ युवा न्याय मांग रहे हैं। भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सरकार पर हमला बोल रहे हैं।
राजनीति में एक पुरानी कहावत है – “मीठा-मीठा गप-गप और कड़वा-कड़वा थू-थू।” जब भाजपा शासित राज्यों में पेपर लीक या भर्ती घोटाला होता है, तो विपक्षी दल आक्रामक होकर प्रदर्शन करते हैं। लेकिन जब वही धांधली विपक्ष शासित राज्यों में होती है, तो उनकी बोलती बंद हो जाती है।
दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेता पेपर लीक के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं। लेकिन 1200 किलोमीटर दूर रांची में उनकी ही पार्टी की सरकार के नाक के नीचे युवा न्याय के लिए भटक रहे हैं। भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर हमलावर हैं। सवाल यही उठ रहा है कि क्या युवाओं का भविष्य सिर्फ सियासी फायदे-नुकसान तक सीमित रहेगा?
युवाओं पर क्या असर पड़ा है?
रांची के छोटे-छोटे कमरों में रहकर सालों से तैयारी करने वाले बेरोजगार छात्र अब हताश हो चुके हैं। कई परिवारों ने अपनी जमीन-जायदाद बेचकर बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग पर पैसा लगाया था। बार-बार परीक्षा रद्द होने और घोटालों से उनका हौसला टूट रहा है। कई छात्र कहते हैं कि अब वे सरकारी नौकरी की तैयारी छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं।

