रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सैकड़ों छात्र कई दिनों से धरना दे रहे हैं। वे झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर जैसे प्रदर्शन की याद दिलाता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मुख्य विवाद 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से शुरू हुआ। परीक्षा अप्रैल 2026 में हुई थी। नतीजे जुलाई में आए तो छात्रों ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मेरिट लिस्ट पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। श्रेणीवार कट-ऑफ अंक भी नहीं बताए गए। एक सफल उम्मीदवार की ओएमआर शीट का कार्बन कॉपी वायरल हो गया। इससे पेपर लीक और धांधली के आरोप लगे।
सीआईडी जांच शुरू हुई। करीब 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जेपीएससी के डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर सहित कई अधिकारी शामिल बताए गए। जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया। मुख्य परीक्षा भी स्थगित कर दी गई।
छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा की बात नहीं है। पिछले कई सालों से जेपीएससी और जेएसएससी की भर्तियों में देरी, पेपर लीक और अनियमितताएं चल रही हैं। हजारों युवा सालों की मेहनत बेकार जाते देख रहे हैं।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
छात्रों ने साफ-साफ अपनी बात रखी है:
- सीबीआई जांच की मांग। वे राज्य की सीआईडी जांच से संतुष्ट नहीं हैं। पिछले सात साल की सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच चाहते हैं।
- 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की मांग।
- भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और समय पर नियुक्ति।
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई और आयोग में सुधार।
- कुछ छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नैतिक इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
आंदोलन में भूख हड़ताल भी शुरू हुई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी समर्थन दिया। छात्र 6 अगस्त को विधानसभा मार्च की तैयारी कर रहे हैं।
क्यों बढ़ रहा है गुस्सा?
सरकारी नौकरी के लिए लाखों युवा सालों से तैयारी करते हैं। जब परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगता है तो उनका भरोसा टूट जाता है। बार-बार विवाद होने से युवा निराश हो रहे हैं। वे कहते हैं कि निष्पक्ष परीक्षा उनका हक है।
झारखंड के छात्र
झारखंड के छात्र सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि निष्पक्ष व्यवस्था मांग रहे हैं। जेपीएससी-जेएसएससी विवाद ने राज्य की भर्ती व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार अगर जल्द बातचीत कर पारदर्शी समाधान निकाले तो युवाओं का भरोसा लौट सकता है। फिलहाल आंदोलन जारी है और छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सही जांच और सुधार से ही इस मुद्दे का हल निकल सकता है।

